सामग्री पर जाएँ
SSIWAA

शिक्षाएँ और कथाएँ

काली चौदस 2026: तिथि, मध्यरात्रि मुहूर्त और नकारात्मक ऊर्जा से रक्षा के उपाय

काली चौदस 2026 शनिवार, 7 नवंबर को दीपावली से एक रात पहले है। जानें मध्यरात्रि मुहूर्त, नरक चतुर्दशी से इसका अंतर, नज़र और नकारात्मक ऊर्जा से रक्षा के सरल घरेलू उपाय, और अपने नाम से रक्षा पूजा कैसे करवाएँ।

सर्वेश्वरी शक्ति अंतर्राष्ट्रीय महिला अघोरी अखाड़ा5 मिनट में पढ़ें

काली चौदस की रात अंधेरे कमरे में जलता सरसों के तेल का दीपक
इस पृष्ठ पर

काली चौदस 2026 शनिवार, 7 नवंबर को है, यानी दीपावली से एक रात पहले। इसे भूत चतुर्दशी या रूप चौदस भी कहते हैं। यह वह रात है जब भक्त माँ लक्ष्मी के स्वागत से पहले भय, नज़र और नकारात्मक ऊर्जा से रक्षा के लिए माँ काली की शरण लेते हैं। इस लेख में आप जानेंगे काली चौदस की तिथि और मध्यरात्रि मुहूर्त, यह नरक चतुर्दशी से कैसे अलग है, घर पर रक्षा के सरल उपाय, और अखाड़े के मनाली आश्रम में अपने नाम से रक्षा पूजा कैसे करवाएँ।

काली चौदस 2026: तिथि और मुहूर्त

  • काली चौदस: शनिवार, 7 नवंबर 2026
  • चतुर्दशी तिथि आरंभ: 7 नवंबर 2026, सुबह 10:47 बजे
  • चतुर्दशी तिथि समाप्त: 8 नवंबर 2026, सुबह 11:27 बजे
  • काली चौदस मुहूर्त (मध्यरात्रि): 7 नवंबर रात 11:39 बजे से 8 नवंबर रात 12:31 बजे तक (लगभग 52 मिनट)
  • नरक चतुर्दशी अभ्यंग स्नान: रविवार, 8 नवंबर 2026, सुबह 5:41 से 6:38 बजे तक

ये समय नई दिल्ली (IST) के अनुसार हैं और हर शहर में कुछ मिनट आगे-पीछे होते हैं। घर पर पूजा करें तो अपने स्थान का पंचांग अवश्य देखें।

काली चौदस, नरक चतुर्दशी और छोटी दीपावली: क्या अंतर है?

तीनों कार्तिक कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी से जुड़े हैं, इसलिए इनके नाम अक्सर आपस में मिल जाते हैं। 2026 में ये अलग-अलग दिन पड़ रहे हैं:

  • काली चौदस मध्यरात्रि में मनाई जाती है, जब रात में चतुर्दशी व्याप्त हो। 2026 में यह 7 नवंबर की रात है। यह गुजरात और पश्चिम भारत में विशेष रूप से प्रचलित है।
  • नरक चतुर्दशी का मुख्य अनुष्ठान अभ्यंग स्नान है, यानी सूर्योदय से पहले तेल स्नान, जब भोर में चतुर्दशी हो। 2026 में यह 8 नवंबर की सुबह है।
  • छोटी दीपावली दीपावली से पहले की दीपों वाली शाम का लोकप्रिय नाम है। कई कैलेंडर इसे 7 नवंबर को दिखाते हैं।

दीपावली की लक्ष्मी पूजा और काली पूजा दोनों 8 नवंबर की रात को हैं।

काली चौदस पर माँ काली की पूजा क्यों

नरक चतुर्दशी की कथा नरकासुर की है, जिसके वध से उसके बंदी मुक्त हुए। काली चौदस यही भाव भीतर की ओर ले जाती है: दीपावली का प्रकाश आने से पहले, जो कुछ अंधकारमय, भारी या शत्रुतापूर्ण है, उसे हटाना होता है।

यही माँ काली का कार्य है। वे भय को काटने वाली और नकारात्मकता का नाश करने वाली माँ हैं। इस रात भक्त उनसे नज़र, अपने विरुद्ध की गई बुरी कामनाओं और वर्ष भर ढोए गए भय को दूर करने की प्रार्थना करते हैं। कई परिवार इसी शाम रक्षक देवता हनुमान जी और काल भैरव की भी पूजा करते हैं।

अघोर दृष्टि: भय से भागना नहीं, उसका सामना करना

लोक मान्यता में काली चौदस वह रात है जब आत्माएँ विचरती हैं, इसीलिए इसे भूत चतुर्दशी कहते हैं। अघोर मार्ग इसे अलग ढंग से देखता है। भय सबसे बड़ा बंधन है, और जो रात सबसे डरावनी लगती है, वही भय से परे माँ से मिलने की सबसे उत्तम रात है।

इसीलिए अघोर साधक परंपरागत रूप से इस रात श्मशान साधना करते हैं। ये साधनाएँ केवल दीक्षित साधकों के लिए हैं, गुरु के प्रत्यक्ष मार्गदर्शन में, और इन्हें कभी अकेले नहीं करना चाहिए। गृहस्थों के लिए मार्ग है भक्ति, सुरक्षित घर और सच्चा संकल्प।

सर्वेश्वरी शक्ति अंतर्राष्ट्रीय महिला अघोरी अखाड़े में रक्षा अनुष्ठान माँ काली और अखाड़े की अधिष्ठात्री देवी माँ प्रत्यंगिरा देवी को अर्पित होते हैं, जो सिंहमुखी माँ हैं और भक्तों की ओर भेजी गई हानि को लौटा देती हैं।

घर पर रक्षा के लिए काली चौदस के सरल उपाय

संध्या के समय

  • घर की, विशेषकर मुख्य द्वार की, अच्छी तरह सफ़ाई करें और टूटी वस्तुएँ व कबाड़ हटा दें।
  • अकाल मृत्यु और अनहोनी से रक्षा के लिए मुख्य द्वार के बाहर दक्षिण दिशा की ओर सरसों के तेल का चौमुखा दीपक (यम दीपक) जलाएँ।
  • मुख्य द्वार, रसोई, जल स्थान और पूजा स्थान पर दीपक जलाएँ।

नज़र से रक्षा

  • कुछ साबुत लाल मिर्च, राई और चुटकी भर नमक लेकर परिवार के हर सदस्य पर सात बार उतारें और घर के बाहर किसी सुरक्षित स्थान पर जला दें।
  • पूजा में अभिमंत्रित काला धागा बच्चों की कलाई पर बाँधें।
  • थोड़ा सेंधा नमक मिला गंगाजल दरवाज़ों पर छिड़कें।

मध्यरात्रि में माँ काली की प्रार्थना

  1. स्नान करके स्वच्छ गहरे रंग या लाल वस्त्र पहनें और माँ काली के चित्र के सामने बैठें।
  2. सरसों के तेल का दीपक और धूप जलाएँ, और श्री गणेश का स्मरण करें।
  3. अपने और परिवार की रक्षा के लिए माँ से संकल्प लें।
  4. लाल गुड़हल, काले तिल, लौंग और भोग अर्पित करें।
  5. "ॐ क्रीं कालिकायै नमः" का 108 बार जाप करें, या यदि आप हनुमान जी की भी पूजा करते हैं तो हनुमान चालीसा का पाठ करें।
  6. आरती करें और कुछ मिनट मौन बैठें, उन भयों को छोड़ते हुए जिन्हें आप पीछे छोड़ना चाहते हैं।

घर की पूजा सात्विक और सरल रखें। तांत्रिक अनुष्ठान, बलि और श्मशान की साधनाएँ घर की पूजा के लिए नहीं हैं।

अपने नाम से रक्षा पूजा करवाएँ

यदि आप नकारात्मकता, बार-बार आती बाधाओं या छिपे विरोध से दबे हुए महसूस करते हैं, तो अखाड़े के पुजारी मनाली आश्रम में आपके नाम और गोत्र के संकल्प के साथ रक्षा पूजा करते हैं:

किसी विशेष समस्या के लिए नकारात्मक ऊर्जा निवारण, काला जादू निवारण या शत्रु समस्या समाधान देखें, या व्यक्तिगत परामर्श बुक करें ताकि अखाड़ा आपको सही अनुष्ठान बता सके। आप कोई भी पूजा कहीं से भी लाइव देख सकते हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

2026 में काली चौदस कब है?

काली चौदस 2026 शनिवार, 7 नवंबर को है। मध्यरात्रि मुहूर्त रात 11:39 बजे से 12:31 बजे तक है (नई दिल्ली समय)।

क्या 2026 में काली चौदस और नरक चतुर्दशी एक ही दिन हैं?

पूरी तरह नहीं। काली चौदस 7 नवंबर की रात को है, जबकि नरक चतुर्दशी का अभ्यंग स्नान 8 नवंबर की सुबह 5:41 से 6:38 बजे तक है।

काली चौदस पर किस देवता की पूजा होती है?

काली चौदस की मुख्य देवी माँ काली हैं। कई भक्त रक्षा के लिए हनुमान जी और काल भैरव की भी पूजा करते हैं।

काली चौदस पर क्या नहीं करना चाहिए?

झगड़े, मदिरा, मांस और कठोर वचनों से बचें, और घर को स्वच्छ व प्रकाशित रखें। गुरु के बिना तांत्रिक या श्मशान अनुष्ठान न करें।

क्या भारत से बाहर रहकर भी भाग ले सकते हैं?

हाँ। अखाड़ा मनाली आश्रम में आपके नाम और गोत्र के संकल्प के साथ पूजा करता है, और आप कहीं से भी लाइव या रिप्ले देख सकते हैं।

दीपावली के प्रकाश से पहले माँ काली आपके घर की हर छाया दूर करें। जय माँ काली।

विषय: kali chaudas · narak chaturdashi · diwali · maa kali · protection · negative energy · aghor · festivals

साझा करें

समझ नहीं आ रहा कि क्या चाहिए?

व्यक्तिगत परामर्श में अखाड़े को बताएँ कि आप किस स्थिति का सामना कर रहे हैं। आपको मार्गदर्शन मिलेगा, और पूजा तभी सुझाई जाएगी जब वह सहायक हो।